Environment Studies -Part-21

पराबैंगनी विकिरण एक प्रकार का है – विद्युत चुंबकीय विकिरण जल को जीवाणु मुक्‍त करने हेतु प्रयुक्‍त होता है/होते हैं – ओजोन, क्‍लोरीन डायऑक्‍साइड, क्‍लोरैमीन यमुना एक्‍शन प्‍लान औपचारिक रूप से प्रारंभ किया गया था – 1993 में ‘यमुना कार्य योजना‘ (Yamuna Action Plan) तथा ‘गोमती कार्य योजना‘ (Gomati Action Plan) को अप्रैल, 1993 मे ंअनुमोदित किया गया – गंगा कार्य योजना – द्वितीय चरण के तहत […]

Environment Studies -Part-20

भारत के कुछ भागों में पीने के जल में प्रदूषक के रूप में पाए जाते हैं – आर्सेनिक, फ्लुओराइड तथा यूरेनियम ‘नॉक-नी संलक्षण’ उत्‍पन्‍न होता है – फ्लुओराइड के प्रदूषण द्वारा यद्यपि पानी में अल्‍प मात्रा में उपलब्‍ध होता है जो मसूड़ों और दांतों को संरक्षण प्रदान करता है परंतु इसका अत्‍यधिक सांद्रण (Excess Concentration) फ्लुओराइड को ग्रहण (Intake) […]

Environment Studies -Part-19

स्‍वचालित वाहनों में एन्‍टीनॉकिंग एजेंट के रूप में प्रयोग किया जाता है – लेड (सीसा) का केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्‍क, पाचन तंत्र इत्‍यादि प्रभावित होते हैं – लेड के कारण पेयजल में कैडमियम की अधिकता से हो जाता है – इटाई-ईटाई रोग पारा (मरकरी) युक्‍त जल पीने से हो जाता हे – मिनामाटा रोग वर्ष 1987 से इस अधिनियम में […]

Environment Studies -Part-18

वायु प्रदूषण से संबंधित नहीं है – युट्रोफिकेशन जल में जब जैविक तथा अजैविक दोनों प्रकार के पोषक तत्‍वों की वृद्धि हो जाती है, तो इस घटना को कहते हैं – सुपोषण अत्‍यधिक पोषकों की उपस्थ्‍िति में शैवालों का विकास तेजी से होने लगता है। इसे कहते हैं – शैवाल ब्‍लूम (Algal BIoom) एस्‍बेस्‍टस फाइबर से घिरे वातावरण […]

Environment Studies -Part-17

सामान्‍य स्थितियों में वातावरण में प्रदूषण उत्‍पन्‍न करने वाली गैस है – कार्बन मोनोऑक्‍साइड (CO) कार्बन मोनोऑक्‍साइड (CO) जो कि रंगहीन (colourless) तथा अति विषैली (Highly Poisonous) होती है – एक प्रमुख प्राथमिक वायु प्रदुषक (Air Pollutant) है CO वायुमंडल में कम समय के लिए रहती है तथा इसका ऑक्‍सीकरण हो जाता है – CO2  में एक द्वितीयक प्रदूषक नहीं […]

Environment Studies -Part-16

जीवभार गैसीकरण को भारत में ऊर्जा संकट के धारणीय (सस्‍टेनेबल) हलों में से एक समझा जाता है। इस संदर्भ में कथन सही हैं – नारियल आवरण, मूंगफली का छिलका और धान की भूसी का उपयोग जीवभार गैसीकरण के लिए किया जा सकता है नारियल आवरण, मूंगफली का छिलका और धान की भूसी द्वारा उत्‍पन्‍न गैस का उपयोग, बिली पैदा […]

Environment Studies -Part-15

शुक्‍लाफांटा वन्‍यजीव अभ्‍यारण्‍य स्थित है – नेपाल में कॉर्बेट राष्‍ट्रीय उद्यान से होकर प्रवाहित होती है – रामगंगा एवं कोसी नदियां ब्रम्‍हपुत्र, दिफ्लु, मोरा दिफ्लु एवं मोरा धनसिरि नदियां प्रवाहित होती है – काजीरंगा राष्‍ट्रीय उद्यान से होकर साइलैंट वैली राष्‍ट्रीय उद्यान से होकर गुजरती है – कुंतीपुजहा नदी पंजाब प्रांत में व्‍यास और सतलुज के संगम पर स्थित […]

Environment Studies -Part-14

उधव पक्षी विहार अवस्थित है – साहेबगंज में उत्‍तर प्रदेश, राजस्‍थान, मध्‍यप्रदेश व प.बंगालमें से जिसमें सर्वाधिक संख्‍या में वन्‍य जीव अभ्‍यारण्‍य (नेशनल पार्क और अभ्‍यारण्‍य) हैं – मध्‍यप्रदेश में सर्वाधिक राष्‍ट्रीय पार्कों की संख्‍या 9-9 हैं – अंडमान-निकाबार एवं मध्‍यप्रदेश में साइबेरियन सारस के लिए आदर्श प्राकृतिक निवास है – राजस्‍थान सरिस्‍का एवं रणथम्‍भौर जिस जानवर के लिए […]

Environment Studies -Part-13

ISFR-2017 के अनुसार, देश के 14 भू-आकृतिक क्षेत्रों (Physiographic Zones) में क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक वृक्षावरण है –मध्‍य उच्‍च भूमियों का लवण सहिष्‍णु वनस्‍पति समुदाय जो विश्‍व के ऐसे उष्‍णकटिबंधीय एवं उपोष्‍ण कटिबंधीय अंत:ज्‍वारीय (Intertidal) क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहां वर्षा का स्‍तर 1000-3000 मि‍मी के मध्‍य एवं ताप का स्‍तर 26-350C के […]

Environment Studies -Part-12

चक्रवात अवरोधक के रूप में कार्य करते हैं – मैंग्रोव वन ओडि़शा के केंद्रपाड़ा जिले में ब्राह्मणी, वैतरणी और महानदी डेल्‍टा क्षेत्र में स्थित है – भितरकनिका गरान यह मैंग्रोव वनों के लिए प्रसिद्ध है। यह एक रामसर स्‍थल (वर्ष 2002 में घोषित) भी है – भितरकनिका गरान सही कथन हैं – टैक्‍सस वृक्ष हिमालय में प्राकृतिक रूप से […]