Environment Studies -Part-10

June 18, 2021
  1. ओजोन परत की मोटाई मौसम के हिसाब से बदलती रहती है। बसंत ऋतु में इसकी मोटाई सबसे ज्‍यादा होती है तथा वर्ष ऋतु में रहती है – सबसे कम
  2. ओजोन परत को मापा जाता है – डॉबसन इकाई (Dobson Unit-DU) में
  3. 00C तथा 1 atm दाब पर शुद्ध ओजोन की 01 मिमी की मोटाई के बराबर होता है – 1 डॉबसन यूनिट
  4. क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन, जो ओज़ोन-ह्रासक पदार्थो के रूप में चर्चित हैं, उनका प्रयोग होता है – सुघट्य फोम के निर्माण में, ऐरोसॉल कैन में दाबकारी एजेंट के रूप में तथा कुछ विशिष्‍ट इलेक्‍ट्रॉनिक अवयवों की सफाई करने में
  5. एक अत्‍यधिक स्‍थायी यौगिक जो वायुमंडल में 80 से 100 वर्षों तक बना रह सकता है –क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन
  6. क्‍लोरोफ्लोरोकार्बन, हैलोन्‍स तथा कार्बन टेट्राक्‍लोराइड तीनों ही पदार्थ हैं –ओजोन रिक्तिकारक
  7. सीएफसी, हैलोन्‍स तथा अन्‍य ओजोन रिक्तिकराण रसायनों जैसे कार्बन टेट्राक्‍लोराइड के उत्‍पादन पर रोक लगाई गई है – मांट्रियल प्रोटोकॉल के अनुसार
  8. अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्र का बनना चिंता का विषय है। इस छिद्र के बनने का संभावित कारण है –विशिष्‍ट ध्रुवीय वाताग्र तथा समतापमंडलीय बादलों की उपस्थिति तथा क्‍लोरोफ्लोरोकार्बनों का अंतर्वाह
  9. ऐसा माध्‍यम जहां क्‍लोरीन यौगिक ओजोन परत का विनाश करने वाले क्‍लोरीन कणों मे परिवर्तित हो जाते हैं – ध्रुवीयसमतापमंडलीय बादल
  10. फ्रिजों में जो गैस भरी जाती है, वह है – मेफ्रोन
  11. प्रशीतक के रूप में बड़े संयंत्रों में प्रयुक्‍त होती है – अमोनिया
  12. सर्वप्रथम वर्ष 1985 में ‘टोटल ओज़ोन मैपिंग स्‍पेक्‍ट्रोमीटर’ की मदद से अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन छिद्र का पता लगाया था – ब्रिटिश दल ने
  13. तिब्‍बत पठार के ऊपर वर्ष 2005 में ‘ओज़ोन आभामंडल’ (ओजोन हैलो) का पता लगाया – जी.डब्‍ल्‍यू. केंट मूर ने
  14. मनुष्‍यों में खांसी, सीने में दर्द उत्‍पन्‍न करने के साथ-साथ फेफड़ों को भी क्षति पहुंचा सकता है – O3 का उच्‍च सांद्रण
  15. सूर्य के उच्‍च आवृत्ति के पराबैंगनी प्रकाश की 93-99 प्रतिशत मात्रा अवशोषित कर लेती है (जो पृथ्‍वी पर जीवन के लिए हानिकारक है) – ओजोन परत
  16. ओज़ोन का अवक्षय करने वाले पदार्थों के प्रयोगपर नियंत्रण करने और उन्‍हें चरणबद्ध रूप से प्रयोग-बाह्य करने (फेजि़ंग आउट) के मुद्दे से संबंद्ध हैं – मॉनिट्रयल प्रोटोकॉल
  17. चमोली के रैणी गांव में वन-कटाई के विरोध में आंदोलन चलाया गया – गौरा देवी के नेतृत्‍व में
  18. जिस पारिस्थितिकीय तंत्र में पौधों का जैविक पदार्थ अधिकतम है, वह है – उष्‍ण्‍ाकि‍टबंधीय वर्षा वन
  19. अधिकतम पादप विविधता पाई जाती है – उष्‍णकटिबंधीय सदाबहार वनों में
  20. यदि हम घडि़याल को उनके प्राकृतिक आवास में देखनाचाहते हैं, तो जिस स्‍थान पर जाना सही होगा, वह है – चंबल नदी
  21. भारत में यदि कछुए की एक जाति का वन्‍य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची । के अंतर्गत संरक्षित घोषित किया गया हो तो इसका निहितार्थ है कि – इसे संरक्षण का वही स्‍तर प्राप्‍त है, जैसा कि बाघ को
  22. वन्‍य जीव सुरक्षा अधिनियम, 1972 के अनुसार किसी व्‍यक्ति द्वारा, विधि द्वारा किए गए कतिपय उपबंधों के अधीन होने के सिवायजिस प्राणी का शिकार नहीं किया जा सकता, वह है – घडि़याल, भारतीय जंगली गधा एवं जंगली भैंस
  23. जलवायु के प्रमुख घटक जो झारखंड राज्‍य के वन के क्षेत्र की जलवायु को प्रभावित कर रहे हैं – जंगल की आग
  24. झारखंड राज्‍य में जंगलों को ‘सुरक्षित वन’ के रूप में वर्गीकृत करने का उद्देश्‍य है – बिना अनुमति सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध
  25. भारत का वह राज्‍य जहां सर्वप्रथम ‘मुख्‍यमंत्रीजन वन योजना’ का प्रारंभी किया गया – झारखंड
  26. सदाबहार वन पाए जाते हैं – पश्चिमी घाट में
  27. उत्‍तर-पूर्व भारत और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के 200 सेमी से अधिक औसत वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाया जाता है – उष्‍णकटिबंधीय सदाबहार वनों का विस्‍तार
  28. विषुवतीय-वनों की अद्वितीय विशेषता/विशेषताएं हैं – ऊँचे, घने वृक्षों की विद्यमानता जिनके कीरीट निरंतर वितान बनाते हों, बहुत-सी जातियों का सह-अस्तित्‍व हो, आधिपादपों की असंख्‍य किस्‍मों की विद्यमानता हो।
  29. विषुवतीय वन ऐसे उष्‍ण कटिबंध क्षेत्रों में मिलते हैं, जहां वर्षा होती है – 200 सेंमी से अधिक
  30. विश्‍व भर की लगभग 80 प्रतिशत जैव-विविधता पाई जाती है – विषुवतीय वनों में
  31. भारत में उपयुक्‍त पारिस्थितक संतुलन बनाए रखने के लिए वनाच्‍छादन हेतु न्‍यूनतम संस्‍तुत भूमि क्षेत्र है –33% Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
  32. राष्‍ट्रीय वन नीति में भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र के जितने प्रशित पर वन रखने का लक्ष्‍य है, वह है – एक तिहाई
  33. राष्‍ट्रीय वन नीति (1952) के अनुसार, जो वन का संवर्ग नहीं है – राष्‍ट्रीय उद्यान
  34. वनों को वर्गीकृत किया गया है – (i) संरक्षित वन (ii) राष्‍ट्रीय वन (iii) ग्राम वन एवं (iv) वृक्ष-भूमि (Tree-Lands) – राष्‍ट्रीय वन नीति (1952) के अनुसार
  35. देहरादून स्थित भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग उपग्रह चित्रण के माध्‍यम से ‘वन‍ स्थिति रिपोर्ट’ (The State of Forest Report) जारी करता है – प्रत्‍येक दो वर्ष पर
  36. भारत में निर्वनीकरण का प्रभाव नहीं है – नगरीकरण
  37. जो एक बार उपयोग होने के बाद पुन: उपयोग में लाए जा सकते हैं – नवीकरणीय संसाधन
  38. वनों से पर्यावरण की गुणवत्‍ता बढ़ती है, क्‍योंकि वन पर्यावरण से कार्बन डायऑक्‍साइड का अवशोषण कर मुक्‍त करते हैं – ऑक्‍सीजन
  39. विकास के चरण के आधार प प्राकृतिक संसाधनों को निम्‍न समूहों में विभाजित किया जा सकता है – संभाव्‍य संसाधन, वा‍स्‍तविक संसाधन, आरक्षित संसाधन, स्‍टॉक संसाधन
  40. जो एक क्षेत्र में स्थित हैं तथा भविष्‍य में भी प्रयोग में लाए जा सकते हैं – संभाव्‍य संसाधन
  41. जिनका सर्वेक्षण किया गया है तथा उनकी मात्रा एवं गुणवत्‍ता का पता लगाया गया है और जिनका वर्तमान समय में प्रयोग किया जा रहा है – वास्‍तविक संसाधन
  42. राष्‍ट्रीय सुदूर संवेदन अभिकरण (NRSA) प्रणाली से चित्रित वह भू क्षेत्र, जो वास्‍तव में वनाच्‍छादित होता है, कहलाता है – वनावरण
  43. मैंग्रोव वनस्‍पतियों का विकास अधिकांशत: होता है – तटों के सहारे
  44. भारत में मैंग्रोव (ज्‍वारीय वन) वनस्‍पति मुख्‍यत: पाई जाती है – सुंदरबन में
  45. ये डेल्‍टा प्रदेशों तथा समुद्र के ज्‍वार वाले भागों में होते हैं तथा इन्‍हें मैंग्रोव वनस्‍पति के नाम से भी जाना जाता है – ज्‍वारीय वन
  46. मैंग्रोव वनस्‍पति का सर्वाधिक क्षेत्र सुंदरबन डेल्‍टा में पाया जाता है। यहांके वनों में विशेष रूप से उल्‍लेखनीय है – सुंदरी वृक्ष
  47. एक संरक्षित कच्‍छ-वनस्‍पति क्षेत्र है – गोवा
  48. भारत में मैंग्रोव वन, सदापर्णी वन और पर्णपाती वनों का संयोजन है – अंडमान और निकाबार द्वीपसमूह में
  49. नागालैंड के पर्वत क्रमश: बंजर होते जा रहे हैं, उसका प्रमुख कारण है – झूम कृषि
  50. वह राज्‍य जिसके द्वारा ‘अपना वन अपना धन’ योजना प्रारंभ की गई है – हिमाचल प्रदेश

admin