Environment Studies -Part-11

June 18, 2021
  1. भारत में वन्‍य जीव संरक्षण अधिनियम लागू किया गया था – वर्ष 1972 में
  2. वन्‍य जीवों की तस्‍करी, अवैध शिकार से रक्षा एवं संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा पारित किया गया था – वन्‍यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
  3. भारत में वन संरक्षण अधिनियम कब पारित किया गया – वर्ष 1980 में
  4. भारत में वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 लागू होने की तिथि है – 25 अक्‍टूबर, 1980
  5. भारतीय वन्‍य जीव संस्‍थ्‍ज्ञान स्थित है – देहरादून में
  6. वन अनुसंधान संस्‍थान स्‍थापित है – देहरादून में
  7. वन अनुसंधान संस्‍थान की स्‍थापना उत्‍तराखंड के देहरादून जिले में की गई थी – वर्ष 1906 में
  8. पर्यावरण से संबंधित है – विज्ञान और पर्यावरण केंद्र, भारतीय वनस्‍पति सर्वेक्षण संस्‍थान, भारतीय वन्‍यजीव संस्‍थान
  9. विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन राष्‍ट्रीय सर्वेक्षण और मानचित्रण के लिए भारत सरकार का एक प्राचीनतम विभाग है – भारतीय सर्वेक्षण विभाग
  10. जे.आर.बी. अल्‍फ्रेड (J.R.B.Alfred) की पुस्‍तक फॉनल डाइवर्सिटी इन इंडिया (Faunal Diversity in India) के अनुसार विश्‍व के कुल जंतु प्रजातियों (Animal Species) की संख्‍या का भारत में पाया जाता है – 28% भाग
  11. भारत की सबसे बड़ी मछली है – व्‍हेल शार्क
  12. यह भारत की ही नहीं पूरे विश्‍व की सबसे बड़ी मछली है तथा यह 50 फुट तक लंबी हो सकती है – व्‍हेल शार्क    
  13. वर्ल्‍ड वाइल्‍डलाईफ फंड (WWF) का प्रतीक जानवर है – जाइन्‍ट पाण्‍डा
  14. इसका वैज्ञानिक नाम ‘Ailuropoda melanoleuca’ है। इसका निवास स्‍थान मुख्‍यत: शीतोष्‍ण चौड़ी पत्‍ती वाले और मिश्रित वनों में मिलता है – जाइन्‍ट पाण्‍डा (Giant Panda)
  15. गैवियलिस (घडि़याल) बहुतायत में पाया जाता है – गंगा में
  16. घडि़याल (Gavialis) एक प्रजाति है – मगरमच्‍छ (Crocodilia) कुल की 
  17. भारत में पाए जोन वाला मगरमच्‍छ तथा हाथी हैं – संकटापन्‍न जातियां
  18. ‘चिपको’ आंदोलन मूल रूप से विरुद्ध था – वन कटाई के
  19. चिपको आंदोलन का नेता माना जाता है – सुंदरलाल बहुगुणा को
  20. देश भर में वनों के विनाश के विरुद्ध हुए संगठित प्रतिरोध को चिपको आंदोलन का नाम दिया गया था –1970 के दशक में
  21. ‘चिपको’ आंदोलन के प्रणेता हैं – चंडीप्रसाद भट्ट
  22. भारत में वन्‍य जीव सप्‍ताह मनाया जाता है – 2 से 8 अक्‍टूबर के मध्‍य
  23. विश्‍व संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के 68वें वार्षिक सत्र के दौरान प्रतिवर्ष ‘विश्‍व वन्‍य जीव दिवस’ (World Wildlife Day) के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया – 3 मार्च को
  24. पगमार्क तकनीक का प्रयोग किया जाता है – विभिन्‍न वन्‍य जन्‍तुओं की जनसंख्‍या के आंकलन के लिए
  25. वन ह्रास का मुख्‍य कारण है – औद्योगिक विकास
  26. राजीव गांधी वन्‍य जीव संरक्षण पुरस्‍कार दिया जाता है – शैक्षिक तथा शोध संस्‍थाओं, वन एवं वन्‍य जीव अधिकारियों तथा वन्‍य जीव संरक्षकों को
  27. ‘नेशनल ब्‍यूरो ऑफ प्‍लांट जेनेटिक रिसोर्सेस’ स्थित है – नई दिल्‍ली में
  28. पेड़-पौधों एवं जंतुओं की सर्वाधिक विविधता विशेषता है – ऊष्‍णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन
  29. उष्‍ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन ऐसे क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहां वर्षा होती है – 100 सेमी से 200 सेमी के मध्‍य
  30. बांस, शीशम, चंदन इत्‍यादित अन्‍य व्‍यावसायिक रूप से महत्‍वपूर्ण वृक्षप्रजातियां पाई जाती है –उष्‍णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन में
  31. ये चौड़ी पत्तियों वाले नमी-युक्‍त वन हैं, जो दक्षिण अमेंरिका के अमेजन बेसिन के एक बड़े भू-भाग पर फैले हैं – अमेज़न वर्षा वन
  32. अमेजन वर्षा वन ‘पृथ्‍वी ग्रह के फेफड़ों’ के रूप में जाना जाता है क्‍योंकि इनकी वनस्‍पति लगातार कार्बन डाइऑक्‍साइडको अवशोषित कर मुक्‍त करती रहती है – आक्‍सीजन को
  33. पृथ्‍वी की 20 प्रतिशत से अधिक ऑक्‍सीजन उत्‍पादित होती है – अमेजन वर्षा वनों द्वारा
  34. वह महाद्वीप जिसमें उष्‍णकटिबंधीय पर्णपाती वनों का विस्‍तार अधिक है – एशिया
  35. मानसूनी वन कहते हैं –उष्‍टकटिबंधीय पर्णपाती वनों को
  36. समाचारों में कभी-कभी दिखाई देने वाले’रेड सैंडर्स’ (Red Sanders) – दक्षिण भारत के एक भाग में पाई जाने वाली एक वृक्ष जाति है।
  37. इसका वैज्ञानिक नाम टेरोकार्पस सेंटेलिनस (Pterocarpus santalinus) है। यह पेड़ आंध्रप्रदेश के पालकोंडा व सेशाचलम पर्वत श्रेणियों में मुख्‍यतया पाया जाता है। इसकी लकड़ी सफेद होती है जो कालांतर में लाल रंग के चिपचिपे रस के स्राव के कारण लाल हो जाती है – रेड सैंडर्स (रक्‍त चंदन) Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
  38. आयुर्वेद व सिद्धा दवाइयों को बनाने में, पूजा सामग्री में एवं पारंपरिक खिलौनों को बनाने में किया जाता है – रेड सैंडर्स का प्रयोग
  39. राष्‍ट्रीय वन नीति के मुख्‍य उद्देश्‍य क्‍या थे – सामाजिक वानिकीको प्रोत्‍साहन देना, देश की कुल भूमि का एक-तिहाई वनाच्‍छादित करना
  40. मरुस्‍थलीकरण को रोकने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र अभिसमय (United Nations Convention to Combat Desertification) का/के क्‍या महत्‍व है/हैं – इसका उद्देश्‍य नवप्रवर्तनकारी राष्‍ट्रीय कार्यक्रमोंएवं समर्थक अंतरराष्‍ट्रीय भागीदारियों के माध्‍यम से प्रभावकारी कार्यवाही को प्रोत्‍साहित करनाहै,यह मरुस्‍थलीकरण को रोकने में स्‍थानीय लोगों की भागीदारी को प्रोत्‍साहित करने हेतु ऊर्ध्‍वगामी उपागम (बॉटम-अप अप्रोच) के लिए प्रतिबद्ध है।
  41. मरुस्‍थलीकरण को रोकने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र अभिसमय (United Nations Convention to Combat Desertification) की स्‍थापना की गई थी – वर्ष 1994 में
  42. यह अकेला काूनन बाध्‍यकारी समझौता है, जो संयुक्‍त रूप से पेश करता है – पर्यावरण एवं विकास तथा टिकाऊ भूमि प्रबंधन को
  43. भारत में जो नगर वृक्षारोपण में विशिष्‍टता रखता है – वालपराई
  44. वालपराई नगर स्थित है – कोयंबटूर जिले में
  45. चीन, भारत, इंडोनेशिय तथा जापान में से जिसके भौगोलिक क्षेत्र का उच्‍चतम प्रतिशत वनाच्‍छादित है –जापान का
  46. कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 70% भाग पर वन बनाए रखने का संवैधानिक प्रावधान है – भूटान में
  47. एल्‍यु‍मीनियम को इसके पर्यावरणीय हितैषी स्‍वरूप और नवीकरणीय योग्‍य होने के कारण कहा जाता है –हरी धातु
  48. पूर्वी दक्‍कन पठान में प्रमुखतया पाए जाते हैं – शुष्‍क सदाबहार वन
  49. ”वाणिज्यिक दृष्टि से लाभप्रद वृक्षों की एकपादप (Monoculture) कृषि …. की अनुपम प्राकृतिक छटा को नष्‍ट कर रही है। इमारती लकड़ी का विचारशून्‍य दोहन, ताड़ रोपन के लिए विशाल भूखंडोंका निर्वनीकरण,मैंग्रोवों का विनाश, आदिवासियों द्वारा लकड़ी की अवैध कटाईऔर अनाधिकार आखेट समस्‍या को अधिक ही जटिल बनाते हैं। अलवण जल को‍टरिकाएं (Fresh water pockets) त्‍वरित गति से सूख रही हैं, क्‍योंकि निर्वनीकरण और मैंग्रोवों का विनाश हो रहा है” इस उद्धरण में निर्देशित स्‍थान है – सुंदरवन
  50. वर्ष 2004 की सुनामी ने लोगों को यह महसूस करा दिया कि गरान (मैंग्रोव) तटीय आपदाओं के विरूद्ध विश्‍वसनीय सुरक्षा बाड़े का कार्य कर सकते हैं। गरान सुरक्षा बाड़े के रूप में जिस प्रकार कार्य करते हैं, वह है – गरान के वृक्ष अपनी सघन जड़ों के कारण तूफान और ज्‍वारभाटे से नहीं उखड़ते

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