Environment Studies -Part-18

June 18, 2021
  1. वायु प्रदूषण से संबंधित नहीं है – युट्रोफिकेशन
  2. जल में जब जैविक तथा अजैविक दोनों प्रकार के पोषक तत्‍वों की वृद्धि हो जाती है, तो इस घटना को कहते हैं – सुपोषण
  3. अत्‍यधिक पोषकों की उपस्थ्‍िति में शैवालों का विकास तेजी से होने लगता है। इसे कहते हैं – शैवाल ब्‍लूम (Algal BIoom)
  4. एस्‍बेस्‍टस फाइबर से घिरे वातावरण में ज्‍यादा देर रहने से हो जाता है – एस्‍बेस्‍टोसिस
  5. ‘फ्लाई ऐश’ एक प्रदूषक दहन उत्‍पाद है, जो जलाने से प्राप्‍त होता है – कोल (पत्‍थर के कोयले) को Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
  6. कोल के दहन से उत्‍पन्‍न प्रदूषक है – फ्लाई ऐश (Fly ash)
  7. कोयला आधारित ताप विद्युत घरों से उत्‍पन्‍न होने वाले इस सूक्ष्‍म पाउडर से जीवों में होते हैं – श्‍वशन संबंधी रोग
  8. जिसे वायु में मिलने से रोकने के लिए इलेक्‍ट्रोस्‍टेटिक अवक्षेपक (Electrostatic Prescipitator) या अन्‍य कण निस्‍यंदन उपकरणों का प्रयोग किया जाता है – फ्लाई ऐश
  9. ‘ग्रीन मफ्लर’ संबंधित है – ध्‍वनि प्रदूषण से
  10. विशालकाय हरे पौधे अधिक ध्‍वनि प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रोपित किए जाते हैं क्‍योंकि उनमें ध्‍वनि तंरगों को अवशोषित करने की क्षमता होती है। ध्‍वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले ये हरे पौधे कहलाते हैं – ग्रीन मफ्लर
  11. भोपाल गैस त्रासदी (मिथाइल आइसोसाइनेट- ‘मिक’ रिसाव) की घटना हुई थी – 3 दिसंबर, 1984 को
  12. भोपाल मे यूनियन कार्बाइड फैक्‍ट्री से जो गैस रिस गई थी, वह थी – मिथाइल आइसोसायनेट
  13. भोपाल गैस त्रासदी में जिस गैस के रिसने पर बड़े पैमाने पर मृत्‍यु हुई – एम.आई.सी.
  14. भोपाल गैस त्रासदी में संबंधित यौगिक का नाम था – मेथाइल आइसोसायनेट
  15. पॉलिथीन की थैलियों को नष्‍ट नहीं किया जा सकता, क्‍योंकि वे बनी होती हैं – पॉलीमर से
  16. मूलत: कार्बन एवं हाइड्रोजन के अणुओं के मिलने से बनता है। यह एथिलीन CH4 का पॉलीमर (बहुलक) होता है – पॉलि‍थीन
  17. इसकी खोज 1953 ई. इटली के रसायनशास्‍त्री गिलियो नत्‍ता और कार्ल जिगलर (जर्मनी) ने की। इन्‍होंने सर्वप्रथम देखा कि कार्बन एवं हाइड्रोजन के कण आपस में एक श्रृंखला बनाते हैं तथा एकल बन्‍ध एवं द्विबन्‍ध के रूप में स्‍थापित हो जाते हैं। इस खोज के लिए गिलियो नत्‍ता एवं कार्ल जिगलर को 1963 ई. में रसायन का नोबेल पुरस्‍कार प्राप्‍त हुआ – पॉलिथीन की
  18. वस्‍तु जो जीवाणुओं से नष्‍ट नहीं होती – प्‍लास्टिक
  19. जैव-निम्‍नीकरणीय है – रबर
  20. वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं, कहलाते हैं – जैव-निम्‍नीकरणीय
  21. सिगरेट का टुकड़ा, चमड़े का जूता, फोटो फिल्‍म तथा प्‍लास्टिक का थैला में से जिसके क्षय होने में सबसे अधिक समय लगता है – प्‍लास्टिक का थैला
  22. वायु प्रदूषण के जैविक सूचक का कार्य करता है – लाइकेन
  23. शैवाल तथा कवक के द्वारा होता है – लाइकेन का निर्माण
  24. वायु प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव लाइकेन पर पड़ता है क्‍योंकि ये होते हैं, बड़े – संवेदनशील
  25. प्रदूषण संकेतक पौधा है – लाइकेन
  26. लाइकेन्‍स सबसे अच्‍छे सूचक हैं – वायु प्रदूषण के
  27. जैविक ऑक्‍सीजन आवश्‍यकता (बी.ओ.डी़.) एक प्रकार का प्रदूषण सूचकांक है – जलीय वातावरण में
  28. बीओडी का अधिक होना, दर्शाता है – जल के संक्रमित होने को
  29. कार्बनिक अपशिष्‍ट (जैसे-सीवेज) की मात्रा बढ़ने से अपघटन की दर बढ़ जाती है तथा Oका उपयोग भी इसी के साथ-साथ बढ़ जाता है। इसके फलस्‍वरूप मात्रा घट जाती है  घुली ऑक्‍सीजन (Dissolved Oxygen-DO) की
  30. कुछ ही सहनशील प्रजातियों के जीव तथा कुछ कीटों के डिंब ही बहुत अधिक प्रदूषित तथा कम DO वाले जल में जीवित रह सकते हैं, जैसे – ऐनेलीड
  31. जिस जलाशय के DO का मान 0 mgL-1 से नीचे हो जाता है। उसे रखा जाता है – संक्रमित(Contaminated) जल की श्रेणी में
  32. किसी जल क्षेत्र में बी. ओ. डी. की अधिकता संकेत देती हे कि उसका जल – सीवेज से प्रदूषित हो रहा है
  33. नदी में जल प्रदूषण के निर्धारण के लिए घुली हुई मात्रा मापी जाती है – ऑक्‍सीजन की
  34. गंगा नदी में बी. ओ. डी. सर्वाधिक मात्रा में पाया जाता है – कानपुर एवं इलाहाबाद के मध्‍य
  35. जैव उपचारण (Bio-remediation) से तात्‍पर्य है – जीवों द्वारा पर्यावरण से विषैले (Toxic) पदार्थों का निष्‍कासन
  36. इसके द्वारा किसी विशेष स्‍थान पर पर्यावरणीय प्रदूषकों के हानिकारक प्रभाव को समाप्‍त किया जा सकता है। यह जैव रासायनिक चक्र के माध्‍यम से कार्य करता है – जैव-उपचारण (Bio-remediation) Environment Notes For Prathmik Shikshak Samvida Varg 3
  37. जैवोपचार यदि प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में किया जाता है, तो इसे कहा जाता है – स्‍व-स्‍थाने जैवोपचार (In-Situ Bio-remediation)
  38. यदि प्रदूषित पदार्थ को किसी अन्‍य जगह पर ले जाकर इस तकनीक का प्रयोग किया जाता है, तो इसे कहते हैं – बाह्य-स्‍थाने जैवोपचार (Ex-Situ Bio-remediation)
  39. प्रदूषकों को जड़ों व पत्तियों में संगृहीत कर जैवोपचार की क्रिया करना कहलाता है – फाइटोनिष्‍कर्षण (phytoextraction)
  40. जल प्रदूषक नहीं है – सल्‍फर डाइऑक्‍साइड
  41. आर्सेनिक द्वारा जल प्रदूषण सर्वाधिक है – पश्चिम बंगाल में
  42. भारत के गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानी इलाकों तथा बांग्‍लादेश के पद्मा-मेघना के मैदानी इलाकों में भूमिगत जल अत्‍यधिक प्रदूषित है – आर्सेनिक प्रदूषण से
  43. भारत के सात राज्‍यों- पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्‍तर प्रदेश, असम, मणिपुर तथा छत्‍तीसगढ़ के राजनांदगांव में भूमिगत जल अत्‍यधिक प्रभावित है – आर्सेनिक प्रदूषण से
  44. भूजल में आर्सेनिक की अनुमेय सीमा है – 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक
  45. चेर्नोबिल दुर्घटना संबंधित है – नाभिकीय दुर्घटना से
  46. रूस में चेर्नोबिल (Chernobyl) स्थित परमाणु केंद्र में नाभिकीय दुर्घटना हुई थी – 26 अप्रैल, 1986 को
  47. विघटित होते रेडियोएक्टिव न्‍यूक्‍लाइड्स से उत्‍पन्‍न होने वाला विकिरण स्रोत है – रेडियोएक्टिव प्रदूषण का
  48. विकिरणों के प्रभाव से जीवों के आनुवंशिक गुणों पर भी पड़ता है – हानिकारक प्रभाव
  49. जैवीय रूप से अपघिटत होता है – मल
  50. स्‍वचालित वाहन निर्वातक का सबसे अविषालु धातु प्रदूषक है – लेड

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