(Reading Comprehension) – ||पाठ-बोधन||

February 21, 2021

पाठ-बोधन (Reading Comprehension) की परिभाषा

किसी दिए गए पाठ को पढ़कर अध्येता द्वारा प्रतिपाद्य विषय तथा गद्यांश में निहित मूल अर्थ को हृदयंगम करना ही पाठ-बोधन कहलाता है।

इस प्रकार का अभ्यास परीक्षार्थी की योग्यता को जाँचने का सर्वाधिक मापदण्ड होता है। इससे परीक्षार्थी की सही सूझ-बूझ तथा ग्रहण करने की सही क्षमता की परख की जा सकती हैं।

पाठ-बोधन संबंधी सामान्य बातें

(1) दिए गए पाठ का स्तर, विचार, भाषा, शैली आदि प्रत्येक दृष्टि से परीक्षा के स्तर के अनुरूप होता है।
(2) पाठ का स्वरूप साहित्यिक (अधिकांशतः), वैज्ञानिक, विवरणात्मक आदि होता है।
(3) दिया गया पाठ अपठित (अर्थात जो पढ़ा न गया हो) होता है।
(4) अपठित पाठ प्रायः गद्यांश होते हैं, किसी-किसी परीक्षा में पद्यांश भी।
(5) पाठ से ही संबंधित कुछ वस्तुनिष्ठ प्रश्न नीचे दिए गए होते है तथा प्रत्येक के चार/पाँच वैकल्पिक उत्तर सुझाए गए होते हैं। परीक्षार्थी को इनमें से सही उत्तर चुनकर उसे निर्देशानुसार चिन्हित करना होता है।

पाठ-बोधन पर आधारित प्रश्नों को हल करने की विधि(1) प्रथम चरण में पाठ को शीघ्रता से किन्तु ध्यानपूर्वक पढ़कर विषय-वस्तु तथा केन्द्रीय भाव को जानने का प्रयास करें।
(2) दूसरे चरण में पाठ को धीरे-धीरे एवं पूरे मनोयोग से नीचे दिए गए प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए पढ़ें। संभावित उत्तरों को साथ-साथ रेखांकित करें।
(3) तीसरे चरण में प्रश्नों के सही उत्तरों को सावधानीपूर्वक चिन्हांकित करें।
नोट : (i) उत्तर पाठ पर ही आधारित होने चाहिए। कल्पना पर आधारित उत्तर से बचना चाहिए।
(ii) उत्तर प्रसंगानुकूल एवं सीधा होना चाहिए।
(iii) प्रत्येक विकल्प पर विचार करके देखें कि उनमें से किसके अर्थ की संगति संबंधित वाक्य के साथ सही बैठती है।

पाठ-बोधन पर आधारित प्रश्न

नीचे कुछ पाठ-बोधन पर आधारित प्रश्न दिया जा रहा है-

(1) वैज्ञानिक प्रयोग की सफलता ने मनुष्य की बुद्धि का अपूर्व विकास कर दिया है। द्वितीय महायुद्ध में एटम बम की शक्ति ने कुछ क्षणों में ही जापान की अजेय शक्ति को पराजित कर दिया। इस शक्ति की युद्धकालीन सफलता ने अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रान्स आदि सभी देशों को ऐसे शस्त्रास्त्रों के निर्माण की प्रेरणा दी की सभी भयंकर और सर्वविनाशकारी शस्त्र बनाने लगे। अब सेना को पराजित करने तथा शत्रु-देश पर पैदल सेना द्वारा आक्रमण करने के लिए शस्त्र-निर्माण के स्थान पर देश के विनाश करने की दिशा में शस्त्रास्त्र बनने लगे है। इन हथियारों का प्रयोग होने पर शत्रु-देशों की अधिकांश जनता और संपत्ति थोड़े समय में ही नष्ट की जा सकेगी। चूँकि ऐसे शस्त्रास्त्र प्रायः सभी स्वतन्त्र देशों के संग्रहालयों में कुछ न कुछ आ गये है, अतः युद्ध की स्थिति में उनका प्रयोग भी अनिवार्य हो जायेगा।
अतः दुनिया का सर्वनाश या अधिकांश नाश तो अवश्य ही हो जायेगा। इसलिए निः शस्त्रीकरण की योजनाएँ बन रही हैं। शस्त्रास्त्रों के निर्माण में जो दिशा अपनाई गई, उसी के अनुसार आज इतने उत्रत शस्त्रास्त्र बन गये हैं, जिनके प्रयोग से व्यापक विनाश आसन्न दिखाई पड़ता है। अब भी परीक्षणों की रोकथाम तथा बने शस्त्रों के प्रयोग के रोकने के मार्ग खोजे जा रहे हैं। इन प्रयासों के मूल में एक भयंकर आतंक और विश्व विनाश का भय कार्य कर रहा है।

(1) इस गद्यांश का मूल कथ्य क्या है ?

(a) आतंक और सर्वनाश का भय
(b) विश्व में शस्त्रास्त्रों की होड़
(c) द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका
(d) निःशस्त्रीकरण और विश्व शान्ति
उत्तर- (d)

(2) भयंकर विनाशकारी आधुनिक शस्त्रास्त्रों के बनाने की प्रेरणा किसने दी ?

(a) अमेरिका ने
(b) अमेरिका की विजय ने
(c) जापान के विनाश ने
(d) बड़े देशों की पारस्परिक प्रतिस्पर्धा ने
उत्तर- (c)

(3) एटम बम की अपार शक्ति का प्रथम अनुभव कैसे हुआ ?

(a) जापान में हुई भयंकर विनाशलीला से
(b) जापान की अजेय शक्ति की पराजय से
(c) अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस की प्रतिस्पर्धा से
(d) अमेरिका की विजय से
उत्तर- (b)

(4) बड़े-बड़े देश आधुनिक विनाशकारी शस्त्रास्त्र क्यों बना रहे हैं ?

(a) अपनी-अपनी सेनाओं में कमी करने के उद्देश्य से
(b) अपने संसाधनों का प्रयोग करने के उद्देश्य से
(c) अपना-अपना सामरिक व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से
(d) पारस्परिक भय के कारण
उत्तर- (c)

(5) आधुनिक युद्ध भयंकर व विनाशकारी होते हैं क्योंकि-

(a) दोनों देशों के शस्त्रास्त्र इन युद्धों में समाप्त हो जाते हैं।
(b) अधिकांश जनता और उसकी सम्पत्ति नष्ट हो जाती है।
(c) दोनों देशों में महामारी और भुखमरी फैल जाती है।
(d) दोनों देशों की सेनाएँ इन युद्धों में मारी जाती हैं।
उत्तर- (b)

(6) इस गद्यांश का सर्वाधिक उपर्युक्त शीर्षक है-

(a) निःशस्त्रीकरण
(b) आधुनिक शस्त्रास्त्रों का विनाशकारी प्रभाव
(c) एटम बम की शक्ति
(d) आतंक और विश्व-विनाश का भय
उत्तर- (a)

(7) ‘व्यापक विनाश आसन्न दिखाई पड़ता है।’ इस वाक्य में ‘आसन्न’ का अर्थ क्या है ?

(a) अवश्य घटित होने वाला
(b) कुछ समय बाद घटित होने वाला
(c) किसी क्षेत्र विशेष में घटित होने वाला
(d) कभी घटित नहीं होने वाला
उत्तर- (a)

(8) ‘निःशस्त्रीकरण’ से क्या तात्पर्य है ?

(a) आधुनिक शस्त्रास्त्रों का मुक्त व्यापार
(b) आधुनिक शस्त्रास्त्रों के परीक्षण, प्रयोग एवं भंडारण पर प्रतिबंध
(c) एटम की शक्ति का रचनात्मक कार्यों में प्रयोग
(d) एटम बम का जनता पर प्रयोग न करने का संकल्प
उत्तर- (b)

(9) निःशस्त्रीकरण की योजनाएँ क्यों बनाई जा रही हैं ?

(a) क्योंकि आतंक और विश्व के सर्वनाश का भय बढ़ता जा रहा है।
(b) क्योंकि बड़े देशों के संसाधन समाप्त होते जा रहे हैं।
(c) क्योंकि तृतीय विश्व युद्ध की अभी कोई सम्भावना नहीं है।
(d) क्योंकि ये योजनाएँ संयुक्त राष्ट्र संघ ने बनाई हैं।
उत्तर- (a)

(10) विश्व को सर्वनाश से बचाने के लिए कौन सी योजना सर्वाधिक प्रभावी हो सकती है ?

(a) एटम शक्ति का नियोजन
(b) निःशस्त्रीकरण की योजना
(c) प्रत्येक देश को आधुनिक शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित करने की योजना
(d) रूस अमेरिका की मित्रता की योजना
उत्तर- (b)

(2) स्वतंत्र व्यवसाय की अर्थनीति के नये वैश्विक वातावरण ने विदेशी पूँजी निवेश को खुली छूट दे रखी है जिसके कारण दूरदर्शन में ऐसे विज्ञापनों की भरमार हो गई है जो उन्मुक्त वासना, हिंसा, अपराध, लालच और ईर्ष्या जैसी मानव की हीनतम प्रवृत्तियों को आधार मानकर चल रहे हैं। अत्यन्त खेद का विषय है कि राष्ट्रीय दूरदर्शन ने भी उनकी भोंडी नकल की ठान ली है। आधुनिकता के नाम पर जो कुछ दिखाया जा रहा है, सुनाया जा रहा है, उससे भारतीय जीवन मूल्यों का दूर का भी रिश्ता नहीं है, वे सत्य से भी कोसों दूर हैं। नयी पीढ़ी जो स्वयं में रचनात्मक गुणों के विकास करने की जगह दूरदर्शन के सामने बैठकर कुछ सीखना, जानना और मनोरंजन करना चाहती है, उसका भगवान ही मालिक है।
जो असत्य है, वह सत्य नहीं हो सकता। समाज को शिव बनाने का प्रयत्न नहीं होगा तो समाज शव बनेगा ही। आज यह मजबूरी हो गई है कि दूरदर्शन पर दिखावे जाने वाले वासनायुक्त अश्लील दृश्यों से चार पीढ़ियाँ एक साथ आँखें चार कर रही हैं। नतीजा सामने है ,बलात्कार, अपहरण, छोटी बच्चियों के साथ निकट सम्बन्धियों द्वारा शर्मनाक यौनाचार की घटनाओं में वृद्धि। ठुमक कर चलते शिशु दूरदर्शन पर दिखाये और सुनाये जा रहे स्वर और भंगिमाओं पर अपनी कमर लचकाने लगे हैं। ऐसे कार्यक्रम न शिव हैं, न समाज को शिव बनाने की शक्ति है इनमें। फिर जो शिव नहीं, वह सुन्दर कैसे हो सकता है।

(1) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक होगा-

(a) पाश्चात्य उपभोक्तावाद और भरतीय दूरदर्शन
(b) पाश्चात्य जीवन-मूल्यों का प्रचारक भारतीय दूरदर्शन
(c) भारतीय दूरदर्शन की अनर्थकारी भूमिका
(d) भारतीय जीवन-मूल्य और दूरदर्शन
उत्तर- (c)


Shivek Sir gk