Vigyapan Lekhan (Advertisement Writing)- ||विज्ञापन लेखन||

February 21, 2021

विज्ञापन लेखन – (Advertisement Writing)

विज्ञापन ऐसी कला है, जिसके द्वारा थोड़े-से स्थान एवं कम शब्दों में आवश्यक बातें आकर्षक ढंग से दी जाती हैं। इसका उद्देश्य सर्वसाधारण को सूचित करना होता है। इसके द्वारा क्रय-विक्रय, आवश्यकता, किसी गुम या प्राप्त वस्तु, किराए के लिए दातव्य या प्राप्तव्य मकान, रिक्त स्थान या रिक्त पद आदि की सूचना दी जाती है। विज्ञापन में प्रतिशब्द या प्रति पंक्ति पैसे देने पड़ते हैं, इसलिए यह संक्षिप्त, परन्तु आकर्षक होना चाहिए।

सामान्य रूप से विज्ञापन शब्द का अर्थ है ‘ज्ञापन कराना’ या सूचना देना’। विज्ञापन अंग्रेजी शब्द ‘एडवरटाइजिंग’ का हिंदी पर्याय है, इसे ‘सार्वजनकि सूचना की घोषणा’ भी कह सकते हैं’ क्योंकि यह ऐसी सूचना होती है, जो जन-साधारण के हितों से जुड़ी होती है। विज्ञापन उन समस्त गतिविधियों का नाम है, जिनका उद्देश्य किसी विचार, वस्तु या सेवा के विषय में जानकारी प्रसारित करना है और इससे विज्ञापनकर्ता का उद्देश्य ग्राहक को अपनी इच्छा के अनुकूल बनाना है।

(1) रिक्त स्थान के लिए विज्ञापन
संत माइकल स्कूल, दीघा रोड, पटना के लिए गणित, हिन्दी एवं कम्प्यूटर शिक्षकों की आवश्यकता है। योग्यता कम-से-कम ऑनर्स द्वितीय श्रेणी तथा दो वर्षों का अनुभव होना चाहिए। प्रशिक्षितों को प्राथमिकता/वेतनमान आकर्षक/ प्राचार्य के पास 1 अप्रैल, 2017 तक प्रार्थना-पत्र भेजें।

(2) ट्यूशन के लिए विज्ञापन
प्रथम श्रेणी अंग्रेजी एम० ए०, मैट्रिक से इंटरमीडिएट तक अंग्रेजी एवं गणित पढ़नेवाले ट्यूशन-इच्छुक छात्र-छात्रा इस पते पर सम्पर्क करें- विश्वनाथन, 30, टैगोर रोड, कोलकाता।

सूचना-पत्र सूचना-पत्र विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालयों द्वारा कर्मचारियों को भी दी जाती है और किसी खास कार्यक्रम के आयोजकों द्वारा भी आम जनता को दी जाती है। इसमें बनावटीपन नहीं होता, बिल्कुल पक्की जानकारी की बातें दी जाती हैं ?

विज्ञापन की आवश्यकता

औद्योगिकीकरण के दौर में विज्ञापन का जन्म हुआ। आज विज्ञापन, व्यवसाय जगत् का एक अनिवार्य अंग बन चुका है। किसी नए उत्पाद के विषय में जानकारी देने, इसकी विशेषताएँ व प्राप्ति स्थान आदि बताने के लिए विज्ञापन की आवश्यकता पड़ती है। एक ही उत्पाद के क्षेत्र में असंख्य प्रतियोगी आ गए है। यदि विज्ञापन का सहारा न लिया जाए, तो सामान्य जनता तक अपने उत्पाद की जानकारी दी ही नहीं जा सकेगी। आज विज्ञापनों के माध्यम से किसी उत्पाद के बाजार में आने से पहले ही उसके विषय में उपभोक्ताओं के अंदर जिज्ञासा उत्पन्न कर दी जाती है। इस प्रकार विज्ञापन, आधुनिक युग का विशेषकर औद्योगिक संस्कृति का अभिन्न तत्व हो गया है। विज्ञापन विक्रय-व्यवस्था में वस्तु का परिचय कराने, उसकी विशेषताएँ तथा लाभ बताने का काम करके ग्राहक को आकृष्ट करने में उपयोगी भूमिका निभाता है।

विज्ञापन का उद्देश्य

विज्ञापन का कोई एक उद्देश्य नहीं होता है, बल्कि इसके अनेक उद्देश्य होते हैं, जिनमें निम्न तीन सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हैं।

(1) तात्कालिक बिक्री- तात्कालिक रूप से अपने उत्पादों की बिक्री करना भी कंपनियों का महत्त्वपूर्ण कार्य होता हैं।

(2) बिक्री के लिए प्रेरित करना- कंपनियों का कार्य केवल उत्पाद करना ही नहीं होता, बल्कि उस उत्पाद की ब्रिक्री करना और बिक्री बढ़ाना भी होता है।

(3) उत्पाद से लोगों को परिचित कराना- अपने उत्पाद से परिचित कराने, उसके प्रति उत्सुकता जागृत करने, खरीदने की इच्छा जगाने आदि संबंधी कार्य भी महत्त्वपूर्ण है।


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